श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 292
 
 
श्लोक  2.1.292 
গঙ্গা দেখিবারে যত অধ্যাপক যায
শুনিযা, সবার অহঙ্কার চূর্ণ হয
गङ्गा देखिबारे यत अध्यापक याय
शुनिया, सबार अहङ्कार चूर्ण हय
 
 
अनुवाद
गंगा स्नान के लिए जाते समय जब शिक्षकगण ऐसी बातें सुन रहे थे तो उनका अहंकार चूर-चूर हो गया।
 
When the teachers were listening to such things while going to take bath in Ganga, their ego was shattered.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)