श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 286
 
 
श्लोक  2.1.286 
বসিলা আসিযা নগরিযার দুযারে
যাঙ্হার চরণ—লক্ষ্মী-হৃদয-উপরে
वसिला आसिया नगरियार दुयारे
याङ्हार चरण—लक्ष्मी-हृदय-उपरे
 
 
अनुवाद
जिनके चरणकमल लक्ष्मी के हृदय पर स्थित हैं, वे एक स्थानीय निवासी के घर के द्वार पर आकर बैठ गये।
 
He whose lotus feet are situated on the heart of Lakshmi came and sat at the door of a local resident's house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)