श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 283
 
 
श्लोक  2.1.283 
গঙ্গাদাস-পণ্ডিত-চরণে নমস্কার
বেদ-পতি সরস্বতী-পতি—শিষ্য যাঙ্র
गङ्गादास-पण्डित-चरणे नमस्कार
वेद-पति सरस्वती-पति—शिष्य याङ्र
 
 
अनुवाद
मैं गंगादास पंडित के चरणों में अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिनके शिष्य वेदों के भगवान और विद्या की देवी के गुरु हैं।
 
I offer my humble obeisances at the feet of Gangadasa Pandit, whose disciples are the gurus of the Lord of the Vedas and the Goddess of Learning.
तात्पर्य
वेद-पति सरस्वती-पति शब्द संयोजन का विवरण करने के लिए भगवान कृष्ण ने उद्धव से जो कहा था उसका सन्दर्भ श्रीमद भागवतम (11.21.26-43) से मिल सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)