श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 282
 
 
श्लोक  2.1.282 
হরিষ হৈলা গুরু শুনিযা বচন
চলিলা গুরুর করি’ চরণ-বন্দন
हरिष हैला गुरु शुनिया वचन
चलिला गुरुर करि’ चरण-वन्दन
 
 
अनुवाद
भगवान के ये वचन सुनकर गंगादास प्रसन्न हुए और उन्होंने अपने गुरु के चरणों में प्रणाम किया और चले गए।
 
Hearing these words of the Lord, Ganga Das was pleased and he bowed at the feet of his Guru and left.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)