श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 271
 
 
श्लोक  2.1.271 
গুরুর চরণ-ধূলি প্রভু লয শিরে
“বিদ্যা-লাভ হৌ”গুরু আশীর্বাদ করে
गुरुर चरण-धूलि प्रभु लय शिरे
“विद्या-लाभ हौ”गुरु आशीर्वाद करे
 
 
अनुवाद
भगवान ने अपने गुरु के चरणों की धूल ली और उनके गुरु ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा, "तुम ज्ञान प्राप्त करो।"
 
The Lord took the dust from the feet of his Guru and his Guru blessed him saying, "May you attain knowledge."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)