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श्लोक 2.1.271  |
গুরুর চরণ-ধূলি প্রভু লয শিরে
“বিদ্যা-লাভ হৌ”গুরু আশীর্বাদ করে |
गुरुर चरण-धूलि प्रभु लय शिरे
“विद्या-लाभ हौ”गुरु आशीर्वाद करे |
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| अनुवाद |
| भगवान ने अपने गुरु के चरणों की धूल ली और उनके गुरु ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए कहा, "तुम ज्ञान प्राप्त करो।" |
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| The Lord took the dust from the feet of his Guru and his Guru blessed him saying, "May you attain knowledge." |
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