श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 266
 
 
श्लोक  2.1.266 
এবে তান বুঝিবারে না পারি চরিত
কি করিব আমি-সব?—বলহ, পণ্ডিত!”
एबे तान बुझिबारे ना पारि चरित
कि करिब आमि-सब?—बलह, पण्डित!”
 
 
अनुवाद
“हे पंडित, हम उनके वर्तमान गुणों को समझने में असमर्थ हैं, इसलिए कृपया हमें बताएं कि हम क्या करें।”
 
“O Pandit, we are unable to understand his present qualities, so please tell us what we should do.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)