श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 265
 
 
श्लोक  2.1.265 
প্রতি-শব্দে ধাতু-সূত্র একত্র করিযাপ্রতি-
দিন কৃষ্ণ-ব্যাখ্যা করেন বসিযা
प्रति-शब्दे धातु-सूत्र एकत्र करियाप्रति-
दिन कृष्ण-व्याख्या करेन वसिया
 
 
अनुवाद
“हर दिन वे प्रत्येक शब्द की धातु या मौखिक मूल लेते हैं और व्याकरण के नियमों के माध्यम से कृष्ण की व्याख्या करते हैं।
 
“Every day they take the dhatu or verbal root of each word and explain it to Krishna through the rules of grammar.
तात्पर्य
व्याकरण व्युत्पत्ति की प्रक्रिया को अपनी स्वाभाविक तार्किक सीमा तक ले जाकर, श्री गौरांगदेव ने प्रत्येक शब्द के मौलिक रूप, या मूल रूप को प्रत्येक शब्द के आधार और विभक्ति उत्पन्न करने के सूत्रों के साथ इस तरह से एक साथ लाया जैसे कि सभी की व्याख्या कृष्ण के रूप में की जाए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)