श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 262
 
 
श्लोक  2.1.262 
“এবে যত বাখানেন নিমাঞি-পণ্ডিত
শব্দ-সনে বাখানেন কৃষ্ণ-সমীহিত
“एबे यत वाखानेन निमाञि-पण्डित
शब्द-सने वाखानेन कृष्ण-समीहित
 
 
अनुवाद
“निमाई पंडित ने हाल ही में जो भी व्याख्या की है, उसमें उन्होंने प्रत्येक शब्द का अर्थ कृष्ण को ही बताया है।
 
“In whatever interpretation Nimai Pandit has given recently, he has attributed the meaning of every word to Krishna only.
तात्पर्य
संहिता शब्द का अर्थ है "पूर्ण," "वांछित," "इरादा," "इच्छा," या "तात्पर्य।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)