श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 259
 
 
श्लोक  2.1.259 
আমিহ বিরলে গিযা বসি’ পুঙ্থি চাই
বিকালে সকলে যেন হৈ এক ঠাঙি”
आमिह विरले गिया वसि’ पुङ्थि चाइ
विकाले सकले येन है एक ठाङि”
 
 
अनुवाद
"मैं भी एकांत में बैठकर अपनी किताबें देखूँगा। चलो, दोपहर को मिलते हैं।"
 
"I'll also sit alone and look at my books. Come, we'll meet in the afternoon."
तात्पर्य
पुंथि चाई, या चिंती शब्द का अर्थ है "किताब का अध्ययन।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)