श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 256
 
 
श्लोक  2.1.256 
শুনিযা প্রভুর ব্যাখ্যা হাসে শিষ্য-গণ
কেহো বলে,—“হেন বুঝি বাযুর কারণ”
शुनिया प्रभुर व्याख्या हासे शिष्य-गण
केहो बले,—“हेन बुझि वायुर कारण”
 
 
अनुवाद
भगवान का स्पष्टीकरण सुनकर शिष्य हँसने लगे। कुछ ने कहा, "लगता है कि वे प्राण वायु के असंतुलन से प्रभावित हैं।"
 
The disciples laughed at the Lord's explanation. Some said, "It seems he is affected by an imbalance of the vital air."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)