vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
»
श्लोक 243
श्लोक
2.1.243
আপ্ত-মুখে এ-কথাশুনিঞা ভক্ত-গণ
সর্ব-গণে বিতর্ক ভাবেন মনে-মন
आप्त-मुखे ए-कथाशुनिञा भक्त-गण
सर्व-गणे वितर्क भावेन मने-मन
अनुवाद
जब सभी भक्तों ने अपने मित्रों से इस बारे में सुना तो उन्होंने मिलकर चर्चा की और चिंतन करना शुरू कर दिया।
When all the devotees heard about this from their friends, they discussed it together and started thinking.
तात्पर्य
इस श्लोक की दूसरी पंक्ति दर्शाती है कि भक्तजन चर्चा करने, कल्पना करने व विचार-विमर्श करने लगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×