श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 243
 
 
श्लोक  2.1.243 
আপ্ত-মুখে এ-কথাশুনিঞা ভক্ত-গণ
সর্ব-গণে বিতর্ক ভাবেন মনে-মন
आप्त-मुखे ए-कथाशुनिञा भक्त-गण
सर्व-गणे वितर्क भावेन मने-मन
 
 
अनुवाद
जब सभी भक्तों ने अपने मित्रों से इस बारे में सुना तो उन्होंने मिलकर चर्चा की और चिंतन करना शुरू कर दिया।
 
When all the devotees heard about this from their friends, they discussed it together and started thinking.
तात्पर्य
इस श्लोक की दूसरी पंक्ति दर्शाती है कि भक्तजन चर्चा करने, कल्पना करने व विचार-विमर्श करने लगे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)