श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 242
 
 
श्लोक  2.1.242 
কি ভোজনে, কি শযনে, কিবা জাগরণে
কৃষ্ণ-বিনু প্রভু আর কিছু না বাখানে
कि भोजने, कि शयने, किबा जागरणे
कृष्ण-विनु प्रभु आर किछु ना वाखाने
 
 
अनुवाद
चाहे खाते हों, सोते हों, या जागते हों, भगवान कृष्ण के अलावा किसी अन्य विषय पर बात नहीं करते थे।
 
Whether eating, sleeping, or waking, he did not talk about any other subject except Lord Krishna.
तात्पर्य
खाने, सोने और जागते रहने के दौरान, भगवान ने कृष्ण के नामों, स्वरूपों, गुणों और लीलाओं से संबंधित विषयों के अलावा अन्य किसी चीज को महिमामंडित करने का प्रयास नहीं किया। गौरा-नागरी और अन्य अप-सम्प्रदायों से संबंधित लोग कहते हैं कि गृहस्थ गौरांगा ने आसक्त गृहस्थों को अपने पारिवारिक जीवन की समृद्धि के लिए केवल गृहमेध-यज्ञ, या बलिदान करने का निर्देश दिया था। लेकिन इस मामले में, लेखक, ठाकुर श्री वृंदावन दास, भगवान के ऐसे किसी भी, या इसी तरह के प्रयासों का वर्णन नहीं करते हैं, जो एक भक्त के भाव में पूरी तरह से लीन हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)