श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 230
 
 
श्लोक  2.1.230 
স্তবের প্রভাবে গর্ভে দুঃখ নাহি পায
কালে পডে ভুমিতে আপন-অনিচ্ছায
स्तवेर प्रभावे गर्भे दुःख नाहि पाय
काले पडे भुमिते आपन-अनिच्छाय
 
 
अनुवाद
“उसकी प्रार्थना के प्रभाव से बच्चे को गर्भ में कष्ट नहीं होता और समय आने पर वह अनिच्छा से बाहर आ जाता है।
 
“Due to the effect of her prayers, the child does not suffer in the womb and when the time comes, it comes out reluctantly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)