श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 229
 
 
श्लोक  2.1.229 
এই-মত গর্ভ-বাসে পোডে অনুক্ষণ
তাহো ভালবাসে কৃষ্ণ-স্মৃতির কারণ
एइ-मत गर्भ-वासे पोडे अनुक्षण
ताहो भालवासे कृष्ण-स्मृतिर कारण
 
 
अनुवाद
“इस तरह बच्चा अपनी माँ के गर्भ में लगातार जलता रहता है, फिर भी वह उस स्थिति को पसंद करता है क्योंकि वह कृष्ण के बारे में सोच सकता है।
 
“This way the child is constantly burning in his mother's womb, yet he likes that position because he can think of Krishna.
तात्पर्य
ताहो शब्द "गर्भ में वास करने के दुखों से जले होने के बाद भी" का अर्थ देता है।

यद्यपि गर्भ में रहने से उत्पन्न संकट की तीव्र पीड़ा निश्चित रूप से असहनीय है, चूंकि उस स्थिति में कृष्ण की सेवा का सुख है, इसलिए बच्चा उस स्थिति में दुख को स्वादिष्ट और वांछनीय मानता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)