श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 228
 
 
श्लोक  2.1.228 
বারেক করহ যদি এ দুঃখের পার
তোমা বৈ তবে প্রভু, না চাহিমু আর’
बारेक करह यदि ए दुःखेर पार
तोमा बै तबे प्रभु, ना चाहिमु आर’
 
 
अनुवाद
“यदि आप एक बार मुझे जीवन की इस दयनीय स्थिति से मुक्ति दिला दें, तो मैं आपके अलावा किसी अन्य चीज़ की इच्छा नहीं करूंगा।”
 
“If you once free me from this miserable condition of life, I will desire nothing else except you.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)