एतावान् सांख्य-योगाभ्यां
स्व-धर्म-परिनिष्ठया
जन्म-लाभः परः पुंसाम्
अन्ते नारायण-स्मृतिः
"मानव जीवन की सर्वोच्च पूर्णता, या तो पदार्थ और आत्मा के पूर्ण ज्ञान से, रहस्यमय शक्तियों के अभ्यास से या व्यावसायिक कर्तव्य के पूर्ण निर्वहन से प्राप्त की जाती है, जीवन के अंत में भगवान के व्यक्तित्व को याद करना है।"
