श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 225
 
 
श्लोक  2.1.225 
এই-মত দুঃখ প্রভু, কোটি-কোটি জন্ম
পাইলুঙ্ বিস্তর, প্রভু! সব—মোর কর্ম
एइ-मत दुःख प्रभु, कोटि-कोटि जन्म
पाइलुङ् विस्तर, प्रभु! सब—मोर कर्म
 
 
अनुवाद
“हे प्रभु, मैं अपने कर्मों के फलस्वरूप लाखों जन्मों से इस प्रकार कष्ट भोग रहा हूँ।
 
“O Lord, I have been suffering like this for millions of births as a result of my actions.
तात्पर्य
विस्तारा शब्द का अर्थ है "संग्रह" या "बहुतायत।"

कर्म शब्द पिछले दुष्कर्म, पापपूर्ण गतिविधियों, दुर्भाग्य, दुर्भाग्य और बुरी किस्मत के परिणामों को संदर्भित करता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)