श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 218
 
 
श्लोक  2.1.218 
উচিত তাহার এই যোগ্য শাস্তি হয
করিলা ত’ এবে কৃপা কর, মহাশয!
उचित ताहार एइ योग्य शास्ति हय
करिला त’ एबे कृपा कर, महाशय!
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, आपने मुझे उचित दण्ड तो दे दिया है, किन्तु अब मुझ पर दया कीजिए!
 
O Lord, you have given me the appropriate punishment, but now have mercy on me!
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)