श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 215
 
 
श्लोक  2.1.215 
এখন এ-দুঃখে মোর কে করিবে পার?
তুমি সে এখন বন্ধু করিবা উদ্ধার
एखन ए-दुःखे मोर के करिबे पार?
तुमि से एखन बन्धु करिबा उद्धार
 
 
अनुवाद
"अब मुझे इस दयनीय स्थिति से कौन छुड़ाएगा? हे प्रभु, आप ही एकमात्र मित्र हैं जो मुझे छुड़ा सकते हैं।"
 
"Now who will rescue me from this miserable condition? O Lord, you are the only friend who can rescue me."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)