श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 213
 
 
श्लोक  2.1.213 
মিথ্যা ধন-পুত্র-রসে গোঙাইলুঙ্ জনম
না ভজিলুঙ্ তোর দুই অমূল্য চরণ
मिथ्या धन-पुत्र-रसे गोङाइलुङ् जनम
ना भजिलुङ् तोर दुइ अमूल्य चरण
 
 
अनुवाद
"मैंने धन और संतान के सुख की तलाश में अपना जीवन व्यर्थ ही नष्ट कर दिया है। इसलिए मैंने आपके अमूल्य चरणकमलों की पूजा नहीं की है।"
 
"I have wasted my life in pursuit of wealth and the happiness of children. That is why I have not worshipped your priceless feet."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)