श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 211
 
 
श्लोक  2.1.211 
“রক্ষ, কৃষ্ণ! জগত্-জীবের প্রাণ-নাথ
তোমা বৈ দুঃখ—জীব নিবেদিবে কাত
“रक्ष, कृष्ण! जगत्-जीवेर प्राण-नाथ
तोमा बै दुःख—जीव निवेदिबे कात
 
 
अनुवाद
हे कृष्ण, हे ब्रह्माण्ड के जीवन और आत्मा, कृपया मेरी रक्षा करें! आपके अलावा, जीव अपने दुःख किसके सामने प्रस्तुत कर सकता है?
 
O Krishna, O Life and Soul of the universe, please protect me! To whom can a living entity present his sufferings except to you?
तात्पर्य
काटा शब्द (प्राचीन बांग्ला शब्द कुथा, कोथा, कटि, काटा संस्कृत के कुत्र से बना है) का अर्थ है "कहाँ", "कौन", "किसके साथ", या "किसके यहाँ"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)