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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
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श्लोक 208
श्लोक
2.1.208
কোন অতি-পাতকীর জন্ম নাহি হয
গর্ভে গর্ভে হয পুনঃ উত্পত্তি-প্রলয
कोन अति-पातकीर जन्म नाहि हय
गर्भे गर्भे हय पुनः उत्पत्ति-प्रलय
अनुवाद
“कुछ अत्यन्त पापी व्यक्ति तो जन्म भी नहीं लेते; वे बार-बार गर्भ में प्रवेश करते हैं और मर जाते हैं।
“Some extremely sinful people are not even born; they enter the womb again and again and die.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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