श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  2.1.207 
নডিতে না পারে তপ্ত-পঞ্জরের মাঝে
তবে প্রাণ রহে ভবিতব্যতার কাজে
नडिते ना पारे तप्त-पञ्जरेर माझे
तबे प्राण रहे भवितव्यतार काजे
 
 
अनुवाद
"अपनी माँ की गर्म पसलियों में जकड़ा होने के कारण, बच्चा हिल-डुल नहीं सकता। फिर भी, ईश्वर की कृपा से वह जीवित रहता है।"
 
"Being held tight to his mother's warm ribs, the child cannot move. Yet, by the grace of God, he lives."
तात्पर्य
भावितव्यतारे काजे वाक्यांश का अर्थ है "अदृश्य या अपरिहार्य भाग्य के कारण।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)