श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 205
 
 
श्लोक  2.1.205 
কটু, অম্ল, লবণ—জননী যত খায
অঙ্গে গিযা লাগে তার, মহা-মোহ পায
कटु, अम्ल, लवण—जननी यत खाय
अङ्गे गिया लागे तार, महा-मोह पाय
 
 
अनुवाद
“माँ द्वारा खाए जाने वाले सभी कड़वे, खट्टे और नमकीन व्यंजन गर्भ में पल रहे बच्चे के शरीर के लिए बहुत असुविधा पैदा करते हैं।
 
“All the bitter, sour and salty foods consumed by the mother cause a lot of discomfort to the baby's body in the womb.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)