कृष्ण भुली' सेई जीव अनादि-बहिर्मुखा
अतएव माया तारे देया संसार-दुःखा
कभु स्वर्ग उठाया, कभु नरके डुबाया
दंड्य-जने राजा येन नदीते चुबाया
"कृष्ण को भूलकर, जीव अनादि काल से बाह्य रूप से आकर्षित हुआ है। इसलिए माया उसे उसके भौतिक अस्तित्व में सभी प्रकार का दुख देती है। भौतिक स्थिति में, जीव को कभी उच्च ग्रह प्रणालियों और भौतिक समृद्धि के लिए उठाया जाता है और कभी नारकीय स्थिति में डूब जाता है। उसकी स्थिति बिल्कुल एक अपराधी की तरह होती है जिसे राजा पानी में डुबोकर दंडित करता है और फिर उसे फिर से पानी से बाहर निकालता है।"
विशेष रूप से भगवान कपिलदेव के अपनी माता देवहूति के प्रति कथनों पर चर्चा करनी चाहिए, जो श्रीमद भागवतम, तृतीय खंड, अध्याय तीस और अध्याय इकतीस, श्लोक 1-31 में पाए जाते हैं।
