श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 198
 
 
श्लोक  2.1.198 
কপিলের ভাবে প্রভু জননীর স্থানে
যে কহিলা, তাই প্রভু কহযে এখানে
कपिलेर भावे प्रभु जननीर स्थाने
ये कहिला, ताइ प्रभु कहये एखाने
 
 
अनुवाद
भगवान ने कपिल के रूप में अपनी माता को जो कुछ पहले सिखाया था, उसी भाव से उन्होंने पुनः अपनी माता को सिखाया।
 
Whatever the Lord had taught his mother earlier in the form of Kapil, he taught it to his mother again in the same spirit.
तात्पर्य
कपिल और देवहूति के बीच हुई बातचीत का वर्णन श्रीमद् भागवतम्, तृतीय स्कंध, अध्याय पच्चीस में आता है। इसके अतिरिक्त, अध्याय छब्बीस से बत्तीस तक भी कपिल-देवहूति संवाद का उल्लेख मिलता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)