भगवान ने कपिल के रूप में अपनी माता को जो कुछ पहले सिखाया था, उसी भाव से उन्होंने पुनः अपनी माता को सिखाया।
Whatever the Lord had taught his mother earlier in the form of Kapil, he taught it to his mother again in the same spirit.
तात्पर्य
कपिल और देवहूति के बीच हुई बातचीत का वर्णन श्रीमद् भागवतम्, तृतीय स्कंध, अध्याय पच्चीस में आता है। इसके अतिरिक्त, अध्याय छब्बीस से बत्तीस तक भी कपिल-देवहूति संवाद का उल्लेख मिलता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥