श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 184
 
 
श्लोक  2.1.184 
চতুর্-দিকে প্রভুরে বেডিযা জহ্নু-সুতা
তরঙ্গের ছলে জল দেই অলক্ষিতা
चतुर्-दिके प्रभुरे बेडिया जह्नु-सुता
तरङ्गेर छले जल देइ अलक्षिता
 
 
अनुवाद
जह्नु की पुत्री ने भगवान को चारों ओर से घेर लिया और अदृश्य रहते हुए उन पर अपने जल की वर्षा की।
 
Jahnu's daughter surrounded the Lord from all sides and, remaining invisible, showered her waters on Him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)