श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 183
 
 
श्लोक  2.1.183 
তরঙ্গের ছলে নৃত্য করেন জাহ্নবীঅনন্ত-
ব্রহ্মাণ্ড যাঙ্র পদ-যুগে-সেবী
तरङ्गेर छले नृत्य करेन जाह्नवीअनन्त-
ब्रह्माण्ड याङ्र पद-युगे-सेवी
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जाह्नवी ने लहरों के रूप में नृत्य करके भगवान की आराधना की, जिनके चरणों की सेवा असंख्य ब्रह्माण्ड करते हैं।
 
Thus, dancing in the form of waves, Jahnavi worshipped the Lord, whose feet are served by countless universes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)