श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 182
 
 
श्लोक  2.1.182 
গঙ্গার বাডিল প্রভু-পরশে উল্লাস
আনন্দে করেন দেবী তরঙ্গ-প্রকাশ
गङ्गार बाडिल प्रभु-परशे उल्लास
आनन्दे करेन देवी तरङ्ग-प्रकाश
 
 
अनुवाद
भगवान के स्पर्श से देवी गंगा प्रसन्न हो गईं और प्रसन्नता के कारण उन्होंने अपनी उत्तेजना तरंगों के रूप में प्रकट की।
 
Goddess Ganga was pleased by the touch of the Lord and due to her happiness she manifested her excitement in the form of waves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)