श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.1.18 
হৈলা আনন্দ-মযীশচী ভাগ্যবতী
পুত্র দেখি’ হরিষে না জানে আছে কতি
हैला आनन्द-मयीशची भाग्यवती
पुत्र देखि’ हरिषे ना जाने आछे कति
 
 
अनुवाद
परम भाग्यशाली माता शची अपने पुत्र को देखकर आनंद से भर गईं और अपने आप को भूल गईं।
 
The extremely fortunate mother Shachi, on seeing her son, was filled with joy and forgot herself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)