श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  2.1.179 
ব্রহ্মাদির অভিলাষ যে রূপ দেখিতে
হেন প্রভু বিপ্র-রূপে খেলে সে জলেতে
ब्रह्मादिर अभिलाष ये रूप देखिते
हेन प्रभु विप्र-रूपे खेले से जलेते
 
 
अनुवाद
वही भगवान, जिनके दर्शन की ब्रह्मा जैसे व्यक्तित्व इच्छा रखते हैं, अब ब्राह्मण रूप में जल में क्रीड़ा कर रहे थे।
 
The same Lord, whose darshan is desired by personalities like Brahma, was now playing in the water in the form of a Brahmin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)