श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 175
 
 
श्लोक  2.1.175 
হাসি’ বলে বিশ্বম্ভর,—“শুন সব ভাই!
পুঙ্থি বান্ধ’ আজি, চল গঙ্গা-স্নানে যাই”
हासि’ बले विश्वम्भर,—“शुन सब भाइ!
पुङ्थि बान्ध’ आजि, चल गङ्गा-स्नाने याइ”
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर मुस्कुराए और बोले, "सुनो भाइयो! आज के लिए अपनी पुस्तकें समेट लो और चलो गंगा स्नान करने चलें।"
 
Vishvambhar smiled and said, "Listen brothers! Pack up your books for today and let's go take a bath in the Ganga."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)