श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  2.1.165 
শুন ভাই-সব, সত্য আমার বচন
ভজহ অমূল্য কৃষ্ণ-পাদ-পদ্ম-ধন
शुन भाइ-सब, सत्य आमार वचन
भजह अमूल्य कृष्ण-पाद-पद्म-धन
 
 
अनुवाद
हे भाइयो, कृपया मेरा सत्य वचन सुनो। कृष्ण के चरणकमलों की अमूल्य निधि की पूजा करो।
 
O brothers, please listen to my truthful words. Worship the priceless treasure of Krishna's lotus feet.
तात्पर्य
प्रबोधानन्द सरस्वती ने अपने 'श्री चैतन्य चन्द्रामृत' (90) में लिखा है: "हे भक्तगणों, कृष्ण की इन्द्रियों के सुख के विरुद्ध सभी प्रतिकूल शारीरिक और मानसिक क्रियाकलापों को त्याग दो और गौराङ्ग-चन्द्र के चरण-कमलों में आसक्त हो जाओ।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)