श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 164
 
 
श्लोक  2.1.164 
অজামিলে নিস্তারিলা যে-কৃষ্ণের নামে
ধন-কুল-বিদ্যা-মদে তাহা নাহি জানে
अजामिले निस्तारिला ये-कृष्णेर नामे
धन-कुल-विद्या-मदे ताहा नाहि जाने
 
 
अनुवाद
“कृष्ण के पवित्र नामों ने अजामिल को मुक्ति दिलाई, फिर भी जो लोग धन, अच्छे जन्म और शिक्षा के नशे में हैं, वे उन्हें नहीं जानते।
 
“The holy names of Krishna brought liberation to Ajamila, yet those who are intoxicated with wealth, good birth and education do not know Him.
तात्पर्य
अजामिल के कृष्ण-नामभास के माध्यम से छुटकारे का वर्णन करने के लिए किसी को श्रीमद् भागवत, षष्ठ स्कंध, अध्याय एक, श्लोक 21-68 और अध्याय दो का उल्लेख करना चाहिए, जो कृष्ण के नाम के अपमानजनक जप की एक झलक है।

श्रीमद्भागवत (1.8.26) में कुंती ने कृष्ण से की प्रार्थना में इस श्लोक की दूसरी पंक्ति की पुष्टि की है:

जन्मैश्वर्य-श्रुत-श्रीभिः

एधमाना-मदः पुमान्

नैवारहत्यभिधातुं वै

त्वामकिंचन-गोचरम्

"हे भगवान, आपके चरणों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है, लेकिन केवल उन लोगों द्वारा जो भौतिक रूप से थक चुके हैं। जो [भौतिक] प्रगति के पथ पर है, आदरणीय माता-पिता, महान संपन्नता, उच्च शिक्षा और शारीरिक सुंदरता से खुद को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है, वह ईमानदारी के साथ आपसे नहीं मिल सकता है।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)