श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 156
 
 
श्लोक  2.1.156 
এই-মত সকল-শাস্তের অভিপ্রায
ইহাতে সন্দেহ যার, সে-ই দুঃখ পায
एइ-मत सकल-शास्तेर अभिप्राय
इहाते सन्देह यार, से-इ दुःख पाय
 
 
अनुवाद
"यही सभी धर्मग्रंथों का तात्पर्य है। जो कोई इस तथ्य पर संदेह करता है, वह दुःख भोगता है।"
 
"This is the meaning of all scriptures. Whoever doubts this fact suffers."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)