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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
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श्लोक 155
श्लोक
2.1.155
দরিদ্র অধম যদি লয কৃষ্ণ-নাম
সর্ব দোষ থকিলে ও যায কৃষ্ণ-ধাম
दरिद्र अधम यदि लय कृष्ण-नाम
सर्व दोष थकिले ओ याय कृष्ण-धाम
अनुवाद
“यदि कोई गरीब पतित व्यक्ति कृष्ण के पवित्र नामों का जप करने लगता है, तो वह अनेक दोषों के बावजूद कृष्ण के धाम को प्राप्त करता है।
“If a poor fallen person begins to chant the holy names of Krishna, he attains Krishna's abode despite many defects.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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