श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  2.1.152 
মুগ্ধ সব অধ্যাপক কৃষ্ণের মাযায
ছাডিযা কৃষ্ণের ভক্তি অন্য পথে যায
मुग्ध सब अध्यापक कृष्णेर मायाय
छाडिया कृष्णेर भक्ति अन्य पथे याय
 
 
अनुवाद
“कृष्ण की मायावी शक्ति से मोहित होकर शिक्षक कृष्ण की भक्ति सेवा छोड़ देते हैं और अन्य मार्ग अपना लेते हैं।
 
“Bewitched by Krishna's illusory power, teachers abandon Krishna's devotional service and take to other paths.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)