श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 151
 
 
श्लोक  2.1.151 
আগম-বেদান্ত-আদি যত দরশন
সর্ব-শাস্ত্রে কহে ’কৃষ্ণ-পদে ভক্তি-ধন’
आगम-वेदान्त-आदि यत दरशन
सर्व-शास्त्रे कहे ’कृष्ण-पदे भक्ति-धन’
 
 
अनुवाद
“आगम और वेदान्त आदि सभी शास्त्रों में कृष्ण के चरणकमलों की भक्ति की सम्पदा का वर्णन किया गया है।
 
“All the scriptures like Agama and Vedanta etc. describe the wealth of devotion towards the lotus feet of Krishna.
तात्पर्य
आगम या पंचरात्र, जो कि वेदों के विस्तार हैं; उपनिषदें, जो कि वेदों के सिर हैं; और वेदांत, जो कि उपनिषदों का सार हैं; साथ ही साथ विभिन्न दार्शनिक शास्त्र बताते हैं कि कृष्ण के चरण-कमलों की सेवा ही जीवन का लक्ष्य है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)