श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  2.1.148 
প্রভু বলে,—“সর্ব-কাল সত্য কৃষ্ণ-নাম
সর্ব-শাস্ত্রে ’কৃষ্ণ’ বৈ না বলযে আন
प्रभु बले,—“सर्व-काल सत्य कृष्ण-नाम
सर्व-शास्त्रे ’कृष्ण’ बै ना बलये आन
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "कृष्ण के पवित्र नाम शाश्वत सत्य हैं। सभी शास्त्र कृष्ण की ही व्याख्या करते हैं, अन्य किसी की नहीं।"
 
The Lord said, "The holy names of Krishna are eternal truths. All scriptures explain only Krishna and no one else."
तात्पर्य
कृष्ण के पवित्र नाम समय के नियंत्रण में सृजन और विनाश के अधीन अस्थायी वस्तु नहीं हैं। चूंकि कृष्ण के नामों और स्वयं कृष्ण के बीच कोई भौतिक अंतर नहीं है, कृष्ण का स्वरूप, जो कि समय का स्रोत है और उनके पवित्र नाम हर समय अविभाज्य सत्य हैं। सभी वैष्णव साहित्य का कोई उद्देश्य कृष्ण के अतिरिक्त अन्य नहीं है। जैसा कि हरि-वंश में कहा गया है:

वेदे रामायणे चैव

पुराणे भारते तथा

आदावन्ते च मध्ये च

हरिः सर्वत्र गीयते

"वेद साहित्य, जिसमें रामायण, पुराण और महाभारत शामिल हैं, आरंभ (आदौ) से अंत (अन्ते च) तक, साथ ही मध्य (मध्ये च) में भी, केवल हरि, भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व समझाया गया है।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)