श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 145
 
 
श्लोक  2.1.145 
’হরি’ বলি’ পুঙ্থি মেলিলেন শিষ্য-গণ
শুনিঞা আনন্দ হৈলাশ্রী-শচীনন্দন
’हरि’ बलि’ पुङ्थि मेलिलेन शिष्य-गण
शुनिञा आनन्द हैलाश्री-शचीनन्दन
 
 
अनुवाद
विद्यार्थियों ने हरि नाम का जप करते हुए अपनी पुस्तकें खोलीं। यह सुनकर माता शची के पुत्र बहुत प्रसन्न हुए।
 
The students opened their books while chanting the name of Hari. Hearing this, Mother Shachi's sons were very pleased.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)