श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  2.1.136 
অনাথিনী মোরে, কৃষ্ণ! এই দেহ’ বর
সুস্থ-চিত্তে গৃহে মোর রহু বিশ্বম্ভর”
अनाथिनी मोरे, कृष्ण! एइ देह’ वर
सुस्थ-चित्ते गृहे मोर रहु विश्वम्भर”
 
 
अनुवाद
"हे कृष्ण, मेरी रक्षा करने वाला कोई नहीं है! कृपया मुझे वर दीजिए कि विश्वम्भर घर पर शांतिपूर्वक रहें।"
 
"O Krishna, there is no one to protect me! Please grant me the boon that Visvambhara may live peacefully at home."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)