श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  2.1.134 
পুত্রের চরিত্র শচী কিছুই না বুঝে
পুত্রের মঙ্গল লাগি’ গঙ্গা-বিষ্ণু পূজে
पुत्रेर चरित्र शची किछुइ ना बुझे
पुत्रेर मङ्गल लागि’ गङ्गा-विष्णु पूजे
 
 
अनुवाद
माता शची अपने पुत्र के व्यवहार के बारे में कुछ भी समझने में असमर्थ थीं, उन्होंने केवल अपने पुत्र के कल्याण के लिए गंगा और भगवान विष्णु की पूजा की।
 
Mother Shachi was unable to understand anything about her son's behavior, she only worshipped Ganga and Lord Vishnu for the well-being of her son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)