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श्लोक 2.1.132  |
যে-যে-জন আইসে প্রভুরে সম্ভাষিতে
প্রভুর চরিত্র কেহ না পারে বুঝিতে |
ये-ये-जन आइसे प्रभुरे सम्भाषिते
प्रभुर चरित्र केह ना पारे बुझिते |
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| अनुवाद |
| जो भी प्रभु का स्वागत करने आया, वह उनकी विशेषताओं को समझने में असमर्थ था। |
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| Whoever came to welcome the Lord was unable to understand His characteristics. |
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