श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  2.1.131 
আসিযা বসিলা বিষ্ণু-গৃহের দুযারে
প্রীতি করি’ বিদায দিলেন সবাকারে
आसिया वसिला विष्णु-गृहेर दुयारे
प्रीति करि’ विदाय दिलेन सबाकारे
 
 
अनुवाद
अपने घर पहुँचकर भगवान विष्णु मंदिर के द्वार पर बैठ गए, जहाँ उन्होंने अपने शिष्यों को स्नेहपूर्वक विदाई दी।
 
Reaching his home, Lord Vishnu sat at the entrance of the temple, where he affectionately bid farewell to his disciples.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)