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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
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श्लोक 130
श्लोक
2.1.130
শুভ দৃষ্টিপাত প্রভু করি’ সবাকারে
আইলেন মহাপ্রভু আপন-মন্দিরে
शुभ दृष्टिपात प्रभु करि’ सबाकारे
आइलेन महाप्रभु आपन-मन्दिरे
अनुवाद
सब पर दया दृष्टि डालकर महाप्रभु अपने घर लौट गये।
After looking kindly at everyone, Mahaprabhu returned to his home.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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