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श्लोक 2.1.129  |
জযকার দিতে লাগিলেন নারী-গণ
পরম-আনন্দ হৈল মুকুন্দ-ভবন |
जयकार दिते लागिलेन नारी-गण
परम-आनन्द हैल मुकुन्द-भवन |
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| अनुवाद |
| सभी स्त्रियों ने मंगल ध्वनि की और मुकुन्द का घर परम सुख का निवास बन गया। |
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| All the women chanted auspicious sounds and Mukunda's house became an abode of ultimate happiness. |
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