श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  2.1.129 
জযকার দিতে লাগিলেন নারী-গণ
পরম-আনন্দ হৈল মুকুন্দ-ভবন
जयकार दिते लागिलेन नारी-गण
परम-आनन्द हैल मुकुन्द-भवन
 
 
अनुवाद
सभी स्त्रियों ने मंगल ध्वनि की और मुकुन्द का घर परम सुख का निवास बन गया।
 
All the women chanted auspicious sounds and Mukunda's house became an abode of ultimate happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)