श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  2.1.128 
পুরুষোত্তম-সঞ্জযেরে প্রভু কৈল কোলে
সিঞ্চিলেন অঙ্গ তান নযনের জলে
पुरुषोत्तम-सञ्जयेरे प्रभु कैल कोले
सिञ्चिलेन अङ्ग तान नयनेर जले
 
 
अनुवाद
भगवान ने पुरुषोत्तम संजय को गले लगा लिया और उनके शरीर को आँसुओं से भिगो दिया।
 
The Lord embraced the Supreme Being Sanjaya and drenched his body with tears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)