श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  2.1.125 
গুরু নমস্করিযা চলিলা বিশ্বম্ভর
চতুর্-দিকে পডুযা বেষ্টিত শশধর
गुरु नमस्करिया चलिला विश्वम्भर
चतुर्-दिके पडुया वेष्टित शशधर
 
 
अनुवाद
अपने गुरु को प्रणाम करके विश्वम्भर चले गए। अपने शिष्यों से घिरे हुए, वे तारों के बीच चन्द्रमा के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
After paying his respects to his guru, Visvambhara departed. Surrounded by his disciples, he appeared like the moon among the stars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)