श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  2.1.124 
এখনে আইলা তুমি সবার প্রকাশ
কালি হৈতে পডাইবা আজি যাহ বাস”
एखने आइला तुमि सबार प्रकाश
कालि हैते पडाइबा आजि याह वास”
 
 
अनुवाद
"अब जब आप लौट आए हैं, तो कल से आपको पढ़ाना शुरू कर देना चाहिए। आज ही घर जाइए।"
 
"Now that you're back, you should start teaching tomorrow. Go home today."
तात्पर्य
सबारा प्रकाशः वाक्यांश भगवान की ओर इशारा करता है, जो हर किसी के दिल में खूबसूरती और आनंद दिखाते हैं, जो श्रद्धा और सम्मान के उज्ज्वल मूड को पुनर्जीवित करते हैं और जो असली सच्चाई को प्रकट करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)