श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  2.1.121 
গুরুর করিলা প্রভু চরণ বন্দন
সম্ভ্রমে উঠিযা গুরু কৈলা আলিঙ্গন
गुरुर करिला प्रभु चरण वन्दन
सम्भ्रमे उठिया गुरु कैला आलिङ्गन
 
 
अनुवाद
भगवान ने अपने गुरु के चरणों में प्रणाम किया, गुरु तुरंत आदरपूर्वक उठे और भगवान को गले लगा लिया।
 
The Lord bowed at the feet of his Guru, the Guru immediately stood up respectfully and embraced the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)